आई डब्लू एम बज्ज ने मिशन मंगल की समीक्षा की

मिशन मंगल की समीक्षा: इस मंगल मिशन यात्रा में सब कुछ कुशल ‘ मंगल ‘ है

15 अगस्त 2019, आईएसआरओ को 50 वर्ष पूरे हुए और उसी दिन रिलीज एक फिल्म जो असल में आईएसआरओ की सबसे बड़ी उपलब्धियों को मनाता है। ‘ मिशन मंगल ‘ या मिशन मार्स, हम सभी जानते है कि ये कहानी भारत के पहले सफल मिशन की है, अपने सैटलाइट को मार्स पर भेजने की।

भारत यह करने वाला पहला देश नहीं था लेकिन अपने पहले प्रयास में भी और यही फैक्टर सुनिश्चित है कि दिलचस्प है। कहानी शुरू होती है जहा भारतीय वैज्ञानिक, जिसके मुख्य राकेश धवन (अक्षय कुमार) और तारा शिंदे (विद्या बालन) है, जो निश्चित करते है मार्स के लिए मिशन करने का एक बड़ा ही विचित्र रास्ता इस्तमाल करके जो है होम साइंस तरीका की कैसे भारतीय पूरी तलती है और पैन में बनती है। स्वाभाविक रूप से, वे अन्य की तरह बाधाओं का सामना करते हैं, विशेष रूप से जब रशिया इस मिशन में विफल हो गया हो भारत इसे होम साइंस के तरीके से करना चाहता है। लेकिन आत्मा विश्वास के ऊपर कुछ नहीं है? यही कारण है, बहुत मेहनत के बाद उन्हें अनुमति मिल जाती है, और वो एक टीम बनाते है जूनियर लेकिन अच्छे वैज्ञानिक की जो प्रेरणा मिलने के बाद और रवैया के बदलाव के बाद को उन्हें चाहिए था अपना सर्वश्रेष्ठ देते है।

नेहा सिद्दकी (कीर्ति कुल्हाड़ी), कृतिका अग्रवाल(तापसी पन्नू), एका गांधी (सोनाक्षी सिन्हा), वर्षा गौड़ा (नित्य मेनन) की टीम होती है। और इस मिशन में शरमन जोशी और अभिनेता एच जी दत्तात्रेय भी शामिल हो जाते है।हालाँकि वे उस असंभव कार्य का सामना करते हैं जहाँ मिशन बस असंभव दिखता है, वे अंततः इसे करने में सक्षम हैं और इसे पूरा करते हैं, जिससे भारत इस उपलब्धि को हासिल करने वाला पहला देश बन जाता है।

आई डब्लू एम बज्ज के विचार: फिल्म आप सभी में देशभक्ति की भावना और राष्ट्रीयता की भावना को जगाने के लिए है और क्योंकि ये स्वतंत्रता दिन के अवसर पर रिलीज हुआ है चंद्रयान मिशन के साथ और आईएसआरओ को भी 50 वर्ष पूरे हुए है, तो ये मूवी के लिए काफी अच्छी बात रही है। हालांकि, कहानी में कई खामियां हैं, और कथा में कुछ निश्चित क्षेत्र हैं जो अनावश्यक हैं। अक्षय कुमार के अलावा वो विद्या बालन है जिन्होंने फिल्म को सच में साथ के रखा है। मूवी के बारे के को अच्छी बात है वो ये है कि इस तरह के एक विशाल कलाकार जब साथ आते है, तो असुरक्षा की भावना आम तौर पर होती है, लेकिन वे सभी अपनी भूमिका सीमाओं के भीतर बेहद सुरक्षित दिखते हैं। प्रदर्शन अच्छे हैं लेकिन यह टीम वर्क है जिसके परिणामस्वरूप एक सफल आउटपुट मिलता है और मिशन मंगल के मामले में भी ऐसा ही होता है।आखिरकार, बारिश भी वैज्ञानिक के इस समर्पण और दृढ़ निश्चय को रोक नहीं सकती है, जिनका एक मात्र मिशन था भारत को गर्व महसूस कराना। क्लाइमेक्स और बिल्ड अप क्लाइमेक्स आपको बहुत अच्छा लगेगा। ये आपको भारतीय होने पर गर्व अनुभव कराएगा। कुल मिलाकर, आईएसआरओ और उनके सफल मिशन के बारे में अधिक जानने के लिए इसे देखें, जिसने पूरे देश को गर्व महसूस कराया।

3/5 हमारी रेटिंग है।

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