विराफ पटेल जिन्हें हालही में ऑल्ट बालाजी के द वर्डिक्ट में देखा गया, उन्होंने आई डब्लू एम बज्ज.कॉम से बातचीत की।

विराफ पटेल, हैंडसम और टैलेंटेड अभिनेता, को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है! उन्होंने हर कठिन भूमिका निभाई गई और अपनी शानदार स्क्रीन उपस्थिति से सभी को प्रभावित कर दिया है।

विराफ जिन्होंने टीवी पर शानदार किरदार निभाए है किस्मत, एक बूंद इश्क़, माही वे, नामकरण और कई शो में; अब वेब प्लेटफॉर्म के विभिन्न किरदार निभा कर काफी खुश है।

वेब सीरीज 13 मसूरी, फ्लिप, हार्टब्रेक होटल और आदि का हिस्सा होने के बाद उन्हें हालही में ऑल्ट बालाजी के सीरीज द वर्डिक्ट – स्टेट वर्सेस नानावती में देखा गया था जहा उन्होंने प्रेम आहूजा का किरदार निभाया था।

आई डब्लू एम बज्ज.कॉम के साथ बातचीत में विराफ पटेल ने स्पष्ट बातचीत में उन्होंने अपने जीवन-बदलते अनुभव, अपनी पसंद, नापसंद और बहुत कुछ के बारे में बात की।

विराफ पटेल की इंटरव्यू से कुछ एक्सर्पट्स

आपकी वेब स्पेस पर दिलचस्प किरदार के साथ काफी अच्छी यात्रा रही है। आप हमे अपने वेब के अनुभव के बारे में कुछ बताइए, विराफ पटेल ?

वेब दुनिया में हर कलाकार के लिए बहुत सी संभावना है। लगभग बहुत सारी। उम्मीद है कि आगे जाकर मैं उसका हिस्सा बनूं। आगे दिलचस्प समय है। हमने अभी केवल शुरुआत की है!

द वर्डिक्ट एसा विषय है जो कभी भी केंद्रित किया जाए तो हमारा पूरा ध्यान अपनी ओर कर लेता है। ऑल्ट बालाजी की सीरीज में मुख्य किरदार निभाकर आपको कैसा लगा?

मुझे संदेह है कि द वर्डिक्ट सीरीज़ में एक ‘मुख्य’ भूमिका है। निर्माता वेब माध्यमों के लंबे प्रारूप के लक्जरी का अच्छा लाभ उठाते हैं, बहुत सारे योग्य पात्रों के बारे में विस्तार से बताते हैं।

हाँ! मैं प्रेम आहूजा का किरदार निभाने को लेकर थोड़ा अनिश्चित था, क्योंकि हाल में ही ‘ रुस्तम ’ की गई थी, लेकिन तब हमारे निर्देशक शशांत शाह ने मुझे इस भाग के लिए परीक्षण करने के लिए कहा (ये करने के लिए मैं उनका आभारी रहूंगा)। उन्होंने मुझे इसके बाद स्क्रिप्ट्स भेजीं और मुझे महसूस हुआ कि लेखक वास्तव में यहां कुछ अलग और बहादुर करने की कोशिश कर रहे हैं, और इसलिए मैंने ये कर लिया।

आपकी भूमिका में क्या बारीकियाँ हैं जिन्हें आपको द वर्डिक्ट के लिए मेहनत करनी पड़ी?

प्रेम आहूजा 50 की दशक में रहता था, जहा भाषा अभी से बहुत अलग थी, लेकिन मानव का व्यवहार हमेशा समान रहता है। किसी अन्य युग के व्यक्ति की तरह दिखाई और सुनाई देना, फिर भी रिलेतेबल, सबसे दिलचस्प हिस्सा था। वहीं पीरियड ड्रामा की सुंदरता है।

और, अधिकतर ऑन स्क्रीन नरेटिव्स में, प्रेम एक गौरवशाली कैसानोवा है; लेकिन लेखक / निर्माता उसकी अपील को मानवीकृत करना चाहते थे। मैंने उस दृष्टि में काम करने की कोशिश की है। अब देखते है कि दर्शक किस तरह से प्रतिक्रिया देते हैं।

एक अभिनेता के रूप में, ऐसा क्या है जो आपको संतुष्टि देता है?

शूट पर वह डायरेक्टर की मान्यता है, और वो चीयर जो आपको अपने पीर्स से मिलता है जो मुझे काम की संतुष्टि देता है। लेकिन मैं आपको एक वास्तविक जीवन की एपिसोड शेयर करता हूं कि असल संतुष्टि क्या होती हैं।

एक वर्ष या उससे कुछ पहले, मैं अपने एक करीबी दोस्त की शादी में गया था जिसकी दुल्हन उससे 11 वर्ष छोटी है और वह पैदा एक साउथ इंडियन कल्चर का परिवार था। मैं शूट से सीधा शादी में गया और मुझे गिफ्ट लेने का भी समय नहीं मिला। मुझे वहां पर ये बुरा लग रहा था कि मैंने कोई गिफ्ट नहीं लाया है और दूसरी तरफ दुल्हन लगातार ये बोल रही थी कि ‘ आपको मेरी मम्मी से मिलना चाहिए, वो आपसे मिलना चाहती है ‘। तो संगीत के समय में मुझे मेरे दोस्त के सास से मिलने के जाया गया, जिसके बारे में मुझे कहा गया की वो एक सीनियर डॉक्टर है जो अपने टाउन में चैरिटेबल ट्रस्ट चलाती है। मैंने खुदको उनके दामाद के अच्छे दोस्त की तरह सामने रखना चाहता था, उन्होंने कहा,” बेटा मैंने नामकरण देखा है और मुझे आपके किरदार का दर्द महसूस हुआ क्योंकि आपकी माँ (जिसका किरदार ग्रेट रीमा लागू निभाती है) ने आपकी प्रेमी आयशा (बरखा बिष्ट द्वारा निभाया गया किरदार) को स्वीकार नहीं किया। इसलिए मैंने तभी सोचा की मैं अपने बच्चो को ये दर्द का सामना नहीं करने दूंगी। इसलिए जब मेरी बेटी ने मुझे कहा कि वो एक नॉर्थ इंडियन डिवॉर्सी लड़के से शादी करना चाहती है जो उससे 11 साल बड़ा है, तब मैंने कहा को ये तुम चाहती हो तो यही होगा।”

मैं उस शादी में गया था इस शर्म से कि मैंने कोई गिफ्ट नहीं लाया है लेकिन मैं वहां से आया एक एसे विशेष गिफ्ट के साथ जो मुझे आज तक किसी ने नहीं दिया था। मुझे याद है मेरी दोस्त की सासू माँ के साथ तस्वीर लेना और उनके शब्द हर शाम को स्टार प्लस के भट्ट साहब, क्रिएटर, गुरुदेव द प्रोड्यूस और गौरव बनर्जी के साथ शेयर करना क्योंकि मुझे पता था कि ये शब्द उनके लिए भी काफी मायने रखते है।

कॉमर्स की सागा के बाद, हम सभी हमारे दर्शकों और उनके जीवन विकल्प के लिए सही करना चाहते हैं। तो हाँ, जब आप देखते हैं कि जिस कहानी का आप एक हिस्सा हैं, उसने दर्शकों कि सोच में कोई बदलाव लाया है, उन्हें भावनात्मक या बौद्धिक रूप से समृद्ध किया है, यह विशेष है जो इसे महत्वपूर्ण बनाता है।

विराफ पटेल, वो क्या फैक्टर है जो आप एक किरदार का चुनाव करते समय देखते है ?

‘ राइटिंग ‘ और ‘ लोग ‘ उस रिटेन मटेरियल को कैसे प्रस्तुत है उस पर वो दो फैक्टर है जो मैं हमेशा देखता हूं।

लेखन मेरे लिए महत्वपूर्ण है मैंने कहीं पढ़ा, अगर यह पेज पर नहीं है, तो मंच पर नहीं होगा, और मुझे लगता है कि इसमें बहुत सारी सच्चाई है। मुझे अच्छी राइटिंग वाले शो पसंद है और लेखक मेरे पसंदीदा है, मैं उनका फैन हूं।

और जब मैं लोगो की बात करता हूं तो उसका मतलब ये है कि मैं जिनके साथ काम करने वाला हूं, वो दिमाग जिनके साथ मैं बातचीत करने वाला हूं अपने हर दिन पर। मेरा मानना है कि मैं उन टीम सदस्यों के साथ आगे बढ़ सकता हूं जो मुझे अधिक बेहतर और आवेशपूर्ण है।

जब मैं राइटिंग के प्रति निश्चित नहीं होता है तो मैं लोगो पर भरोसा करता हूं और जब मैं लोगो के लिए निश्चित नहीं होता हूं तो राइटिंग पर भरोसा करता हूं। और जब मैं दोनों पर निश्चित नहीं होता हूं तो गट पर भरोसा करता हूं।

द वर्डिक्ट के बड़े कास्ट के साथ काम करना कैसा रहा ?

थोड़ा वियर्ड! क्योंकि एक तरफ, मेरे साथ सुंदर हाफ स्वीडिश और हाफ ग्रीक एल्ली अब्राहम थी और फिर थी मेड क्रेकपोट कुब्रा सेट और दूसरी तरफ वो थे माएस्ट्रोस सौरभ शुक्ला, मकरंद देशपांडे ऑब्जर्व करने के लिए। लेकिन अधिकतर समय में मैंने खुद की तरह व्यवहार करने की कोशिश की। मानव के साथ काम करना काफी आसान था। बाकी के कलाकार से बातचीत मेरे फोटोग्राफिक वर्जन से हुई।मुझे सोनी राजदान, काफी समय से मेरी पसंदीदा के साथ भी कुछ क्षण मिले। वो काफी स्वीट है (मुस्कुराते हुए)

द वर्डिक्ट में कौनसा किरदार आपके दिल के करीब है ?

मैं सोचता हूं कि मेरे दिल के करीब इस कहानी की दो महिला के किरदार है जो सिल्विया नानावती एल्ली द्वारा निभाया गया और मेमी आहूजा कुब्ब्रा द्वारा निभाया गया किरदार, प्रेम की बहन का था।

और मैं ये सोचता हूं कि कैसे सिल्विया और कावस नानावती ने अपने तीन बच्चों को इस ट्रौमा से बचाया। उसके बाद उनका जीवन बहुत निजी जीवन था, इसलिए कोई भी वास्तव में नहीं जानता कि बच्चो ने बड़े होते समय क्या सामना किया और इस अतीत के साथ कैसे बाहर आए। मुझे आशा है कि वे कहीं भी ठीक हैं।

क्या आपको लगता है कि टीवी पूरी तरह महिला ओरिएंटेड माध्यम बन गया है ?

शायद हमेशा था। लेडीज हमारे देश में टीवी के सबसे बड़े उपभोक्ता हैं, क्योंकि यह अधिकांश आंकड़ों में देखा गया है। यह केवल निष्पक्ष है कि सामग्री महिला ओरिएंटेड बनी हुई है।

क्या हम आपको भविष्य में टीवी पर वापस देख सकते है ?

क्यों नहीं, मुझे टीवी पर काम करना पसंद है!

एक अभिनेता के रूप में आपके दिलचस्प कैरियर में अभी कैसे एसा कौनसा किरदार है जो आपने नहीं किया है ?

मेरे विचार से रफ एजेस और गरीब सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि का किरदार मैंने नहीं निभाए है

एक एड पर उनके साथ काम करते समय, मैंने अनुराग कश्यप से आप मुझे कास्ट क्यों नहीं कर रहे हो सर – मैं आपका कब से पीछा कर रहा हूं। तब उन्होंने मुझे कहा – तू गरीब नहीं दिखता है !

हम हसे, लेकिन मैं वो किरदार करना चाहता हूं जो अमीर नहीं है।

आपकी अगली किटी क्या है ?

बिजॉय नांबियार के साथ फिल्म आर उसके बाद वेब सीरीज। फिंगर्स क्रोस्ड।

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